💊 “कमीशन की लालच ने निगल ली 25 मासूम ज़िंदगियाँ”
कोल्ड्रिफ कफ सिरप कांड में बड़ा खुलासा – डॉ. सोनी को मिलता था 10% कमीशन, कोर्ट ने जमानत ठुकराई 🚫
सतपुड़ा खबर: मध्यप्रदेश को हिला देने वाले कोल्ड्रिफ कफ सिरप कांड में एक चौंकाने वाला खुलासा हुआ है। परासिया सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र के डॉ. प्रवीण सोनी ने अदालत में स्वीकार किया है कि उन्हें श्रीसन फ़ार्मास्युटिकल्स से कोल्ड्रिफ सिरप प्रिस्क्राइब करने पर 10% कमीशन मिलता था। एक सिरप की एमआरपी ₹89 होने के बावजूद, यह सौदा मानवता से बड़ा साबित हुआ।
जांच एजेंसियों के मुताबिक, डॉ. सोनी की पत्नी और भतीजे की मेडिकल दुकानों पर भी यही सिरप बेचा जा रहा था, जिससे अब यह साफ है कि कमीशन और कारोबार के लालच में मासूमों की जान से खिलवाड़ किया गया।
⚖️ कोर्ट का सख्त रुख
मामले की सुनवाई के दौरान कोर्ट ने कहा —
“डॉक्टर ने मेडिकल गाइडलाइन का खुला उल्लंघन किया है और निर्दोष बच्चों को जानलेवा दवा दी है। यह न केवल पेशेवर अपराध है, बल्कि मानवता के खिलाफ अपराध भी है।”
इसी के साथ, अदालत ने डॉ. सोनी की जमानत याचिका खारिज कर दी, यह कहते हुए कि “ऐसे अपराध पर नरमी नहीं बरती जा सकती।”
🧑⚖️ बचाव पक्ष की दलील
डॉ. सोनी के वकील ने तर्क दिया कि दवा में मिलावट की जिम्मेदारी निर्माता कंपनी की है, डॉक्टर ने तो सिर्फ दवा लिखी थी। लेकिन कोर्ट ने साफ कहा — “दवा लिखने से पहले डॉक्टर की जिम्मेदारी है कि वह उसकी गुणवत्ता और सुरक्षा सुनिश्चित करे। लाभ के लिए बच्चों की जान नहीं बेची जा सकती।”
🚨 स्वास्थ्य तंत्र पर उठे गंभीर सवाल
इस मामले ने एक बार फिर सवाल खड़े कर दिए हैं — क्या हमारा स्वास्थ्य तंत्र इतना कमजोर हो गया है कि कमीशन की लालच जान से ज्यादा कीमती हो गई? कैसे एक सरकारी अस्पताल में काम करने वाला डॉक्टर दवा कंपनियों की दलाली में शामिल हो सकता है?
🗞️ संपादकीय टिप्पणी (सतपुड़ा खबर)
“यह सिर्फ एक डॉक्टर की कहानी नहीं, बल्कि पूरे तंत्र की विफलता का आईना है। अब वक्त आ गया है कि स्वास्थ्य विभाग और प्रशासन ऐसे मामलों में उदाहरण प्रस्तुत करे ताकि कोई भी डॉक्टर कभी कमीशन के लिए मासूमों की जान से खिलवाड़ न कर सके।”
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